कंपनी के शेयर का विश्लेषण (Analysis) दो तरीकों से किया जाता है:
1. Fundamental Analysis जिसमें कंपनी के व्यवसाय, वित्तीय परिस्थिति, कंपनी के Management इत्यादि का विश्लेषण किया जाता है। 2. Technical Analysis जिसमें कंपनी के शेयर का Chart, उसके Technical Indicators, शेयर का Price Action इत्यादि का विश्लेषण किया जाता है। आज हम लोग कंपनी का Fundamental Analysis कैसे किया जाता है यह सीखेंगे।
निवेशकों के लिए शेयर बाज़ार में कई हजारों तरह-तरह के कंपनी के शेयर मौजूद है और इसकी कई अधिक संभावना है कि आप किसी गलत या ख़राब कंपनी के शेयर में अपना निवेश कर बैठे जिससे आपका नुकसान हो सकता है। अतः हमें पता होना चाहिये कि शेयर खरीदने के पहले उसका विश्लेषण कैसे करें (How to Analyze a Share Before Buying).
आज हम इस Article, How to Analyze a Share Before Buying में यह समझेंगे कि किसी कंपनी के शेयर में निवेश करने के पहले हमें उस कंपनी का गुणात्मक विश्लेषण (Qualitative Analysis) कैसे करना चाहिये।
शेयर खरीदने के पहले उसका विश्लेषण कैसे करें / How to Analyze a Share Before Buying
कंपनी के शेयर का Fundamental Analysis दो तरीके से किया जा सकता है:
Top Down Approach:
इस विश्लेषण में सबसे पहले कंपनी किस देश से है उस देश के आर्थिक स्थिति के बारे में जाना जाता है फिर उसके सेक्टर का विश्लेषण किया जाता है फिर अंत में उस सेक्टर में से किसी कंपनी का चयन कर के उसका विश्लेषण किया जाता है।
Bottom Up Approach:
इस Approach में हम सबसे पहले कंपनी का चयन करते है उसके Financial Reports तथा उसके व्यवसाय का विश्लेषण करते है यह करने के बाद, फिर उसके सेक्टर का Analysis करते है कि उस कंपनी के सेक्टर में कितना Growth हो सकता है फिर अंत में देश के आर्थिक परिस्थिति का विश्लेषण करते है।
उपयुक्त बातों से हम समझ चुके है कि कंपनी का विश्लेषण करने के क्या तरीके है तो अब जानते है कि किसी कंपनी के शेयर खरीदने के पहले उसका विश्लेषण कैसे करें (How to Analyze a Share Before Buying):
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कंपनी के सेक्टर का विश्लेषण (Sector Analysis of Company)
कंपनी के शेयर में निवेश के पहले आपको उस कंपनी के सेक्टर को Analyze करना चाहिये। आपको इसमें यह बातें ध्यान रखनी चाहिये कि आप जिस सेक्टर में निवेश कर रहे है भविष्य में वह सेक्टर के Growth कि कितनी संभावना है।
हर सेक्टर में कई प्रकार के उतार-चढ़ाव होते है आपको यह बारीकी से Analyze करना होगा कि आप जिस सेक्टर में निवेश करना चाहते है अभी वह सेक्टर किस चरण पर है तथा उस सेक्टर में कितना जोखिम है।
उदाहरण के लिए अभी के समय में AI Sector अपने शुरुआती चरण में है अतः इसमें अभी कई बदलाव हो सकते है और इसमें निवेश करना अधिक जोखिम भरा होगा परन्तु जब कोई सेक्टर अपने शुरुआती चरण में होता है तो उसमें Growth कि संभावना भी अधिक होती है और इससे आपको अधिक लाभ भी हो सकता है।
कुछ ऐसे सेक्टर भी होते है जिन्हें Cyclical Sector भी कहते है इन सेक्टर में Growth एक निश्चित समय तक रहता है उसके बाद यह सेक्टर में Growth धीमी हो जाती है। Cyclical Sector में आप किस समय निवेश करते है और किस समय उस सेक्टर से अपना निवेश निकाल लेते है यह बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है।
किसी भी सेक्टर या Industry के 5 चरण होते है जो कि निम्नलिखित है:
शुरुआती चरण (Startup Stage): इस चरण में अभी सेक्टर का शुरुआत ही हुआ है तथा अभी इस सेक्टर में बहुत से बदलाव कि संभावना है। अतः इसमें जितना लाभ होने कि संभावना है उतना ही नुकसान भी हो सकता है और इसमें निवेश जोखिम भरा हो सकता है। यदि आप किसी सफल सेक्टर के शुरुआती समय में निवेश करते है तो आपको कई गुना लाभ होने कि संभावना होती है।
विस्तार चरण (Growth Stage): सेक्टर के विस्तार चरण में सेक्टर अपने शुरुआती कठिनाइयों को पार कर के लाभ अर्जित करने लगी है और तेज़ गति से सेक्टर का फैलाव हो रहा है। इस चरण में भी अगर आप किसी सेक्टर के अच्छे कंपनी में निवेश करते है तब भी आपको अच्छा लाभ हो सकता है।
परिपक्व चरण (Mature Stage): इस चरण में सेक्टर का विस्तार सम्पूर्ण तरह से हो चूका है और सेक्टर में अब Growth (विस्तार) कि अधिक संभावना नहीं है। इस चरण में भी अगर आप किसी सेक्टर में निवेश करते है तो आपको एक सामान्य लाभ मिल सकता है।
गिरावट का चरण (Declining Stage): सेक्टर के गिरावट के चरण में सेक्टर में मौजूद कंपनियों के Profit घटने लगते है और उन्हें Loss होना प्रारंभ होने लगता है। यह चरण उस सेक्टर में मौजूद कंपनियों के लिए बहुत ही कठिन होता है इस चरण में बहुत सी कंपनियाँ बंद हो जाती है। यदि आप सेक्टर के इस चरण में किसी कंपनी में निवेश करते है तो आपको नुकसान भी हो सकता है।
पुनरुद्धार चरण (Revival Stage): पुनरुद्धार या Revival Stage यह चरण बहुत से सेक्टर में आते है और कुछ सेक्टर में नहीं भी आ सकता है। इस चरण में सेक्टर अपने Declining Stage को पार करने के बाद कई सारे बदलाव करते है जो फिरसे उस सेक्टर को आगे बढ़ाता है जिसके कारण उस सेक्टर के कंपनियों का Loss फिर से Profit में बदलने लगता है। इस समय में भी यदि आप निवेश करते है तो आपको अच्छा लाभ हो सकता है।
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कंपनी के व्यवसाय का विश्लेषण (Business Analysis of Company)
कंपनी के सेक्टर को समझने के बाद आप आपको कंपनी के व्यवसाय को समझना होगा। कंपनी के व्यवसाय के विश्लेषण के अंतर्गत आपको यह समझना होता है कि कंपनी का Profit कहा से आता है, कंपनी के पास कोई ऐसा Advantage या Product है जो कि उस कंपनी को उसके सेक्टर के अन्य कंपनियों के तुलना में आगे रखता है।
कंपनी के व्यवसाय के विश्लेषण में आपको यह भी देखना चाहिये कि सेक्टर के अंतर्गत कंपनी का कितना प्रतिशत मार्केट शेयर है, किसी सेक्टर में कंपनी का मार्केट शेयर जितना अधिक होगा उसे उतना ही अच्छा माना जाता है।
कंपनी के व्यवसाय को Analysis करने का एक बहुत ही प्रचलित तरीका है जिसे SWOT Analysis (Strength, Weakness, Opportunity, Threat) कहते है जो निम्नलिखित है:
ताकत Strength: इसके अंतर्गत आपको यह देखना होता है कि कंपनी में ऐसे क्या Strengths या ताकत है जो उस कंपनी को उनके Competitors से अलग बनाता है और जो उस कंपनी को Growth में सहायता करेगी।
कमज़ोरी (Weakness): हर कंपनी में कुछ न कुछ कमज़ोरी या Weakness अवश्य ही होता है, परन्तु आपको यह विश्लेषण करना अति आवश्यक है कि कंपनी का Weakness कितना बड़ा है और उसके इस Weakness के वजह से कंपनी के व्यवसाय में कितना प्रभाव डाल सकता है।
उदाहरण के लिए यदि किसी कंपनी का सारा Order किसी एक ही ग्राहक से आता है तो यह एक ऐसा Weakness है जो कंपनी के व्यवसाय को पूरी तरह से प्रभावित कर सकती है। यदि वह एक ग्राहक किसी कारण कंपनी को Order देना बंद कर देता है तो कंपनी का व्यवसाय ही ख़त्म हो सकता है।
अवसर (Opportunity): किसी भी कंपनी के लिए उसके Profit या Business को विकाश करने का अवसर उसके सेक्टर से ही आता है, इसमें आपको यह विश्लेषण करना होता है कि क्या कंपनी अपने सेक्टर या बाहरी कारकों से आने वाले अवसर का लाभ उठा कर अपना व्यवसाय को बढ़ाने में सफल हो रही है या नहीं।
खतरा (Threat): Threat एक बाहरी घटक है जो किसी कंपनी के व्यवसाय को प्रभावित कर सकता है। उदाहरण के लिए कोई दवा कंपनी है जो हृदय रोग को रोकने के लिए दवा बनाती है और सरकार ने केवल उस ही कंपनी को यह दवा बनाने का License दे रखा है परन्तु बाद में सरकार यह नियम हटा कर अन्य कंपनियों को भी License दे सकती है तो यह उस दवा बनाने वाले कंपनी के लिए एक Threat (खतरा) है।
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कंपनी का मौलिक विश्लेषण (Fundamental Analysis of Company):
कंपनी में निवेश के पहले आपको उस कंपनी का Fundamental Analysis करना बहुत आवश्यक है। Fundamental Analysis के अंतर्गत कई सारे Indicators और Ratios जिसे इस Article में सम्पूर्ण तरह से समझाना संभव नहीं है।
कंपनी के शेयर का Fundamental Analysis करने के लिए बहुत से मापदंड बनाये गए है जिसमें से कुछ महत्वपूर्ण Indicators निम्नलिखित है :
मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization): कंपनी का Market Cap आपको यह बतलाता है कि कंपनी का Size कितना है, कंपनी का Market Cap जितना अधिक होगा उसमें निवेश करना उतना ही सुरक्षित माना जाता है परन्तु उसमें आपको Return भी उतना कम मिल सकता है। कंपनी का Market Cap जितना ही छोटा होता है उसमें Growth की संभावना अधिक होता है परन्तु उसमें जोखिम भी अधिक होता है।
ऋण-इक्विटी अनुपात (Debt to Equity Ratio): Debt to Equity Ratio से आपको यह समझने में सहायता होता है कि कंपनी के ऊपर उसके Equity के तुलना में कितना कर्ज (Debt) कितना है कंपनी के ऊपर जितना Debt होगा उसके लिए Growth करना भी उतना ही कठिन होता है। कंपनी का Debt to Equity Ratio जितना कम होता है उसे उतना ही अच्छा माना जाता है।
कैश फ्लो (Cash Flow): कंपनी में निवेश के पहले आपको उस कंपनी के Cash Flow को समझना जरूरी है। आपको हमेशा वैसे ही कंपनी में निवेश करना चाहिये जिसका Cash Flow Positive रहता है और निरंतर बढ़ते रहता है। क्योंकि हो सकता है कि कंपनी का Sales and Profit निरंतर बढ़ रहा हो परन्तु उस कंपनी को उसके Sales के बदले Cash ही नहीं मिल रहा है जिसके कारण कंपनी के लिए अपने व्यवसाय का Growth करना मुश्किल हो जायेगा।
आपको हमेशा देखना चाहिये कि कंपनी का Cash Flow from Operating Activities कितना है यदि यह Positive है और निरंतर बढ़ रह है तो अच्छा है परन्तु यदि यह Negative है तो उस कंपनी में निवेश करना बहुत जोखिम भरा हो सकता है।
कंपनी के वित्तीय रिपोर्ट का विश्लेषण (Financial Report Analysis of Company)
कंपनी में निवेश के पहले आपको उस कंपनी कि वित्तीय रिपोर्ट यानी Financial Report का विश्लेषण करना आवश्यक है। कंपनी का Financial Report का विश्लेषण आप उसके वार्षिक या तिमाही Results से कर सकते है।
SEBI के नियम के अनुसार सभी Listed Companies को अपने Quarterly Result (तिमाही नतीजे) और Annual Result (वार्षिक नतीजे) को सार्वजनिक करना अनिवार्य है। यह आप भारत के Stock Exchanges के Websites NSE या BSE से प्राप्त कर सकते है।
आपको हमेशा कंपनी के Quarterly Results कि तुलना उसके पिछले वर्ष के Same Quarterly Results के साथ करना चाहिये जिसे Year on Year Comparison (YOY) भी कहते है।
कंपनी के Financial Report का विश्लेषण करते समय आपको कुछ निम्नलिखित वित्तीय बातों का विश्लेषण अवश्य करना चाहिये:
कंपनी कि आय (Revenue of Company): कंपनी का विकाश के लिए उसके आय को बढ़ना अति आवश्यक है आपको कंपनी के Financial Result में यह ध्यान देना चाहिये कि कंपनी का Revenue, Year on Year Comparison में प्रति वर्ष बढ़ते रहना चाहिये। हो सकता है, किसी वर्ष कंपनी का आय (Revenue) कंपनी का कोई Asset को बेचने से बढ़ा हो अतः आपको हमेशा Financial Report में कंपनी का Revenue from Operations को देखना चाहिये जिससे यह पता चलता है कि कंपनी अपने Product या Service के Sell से कितना आय किया है।
कंपनी का लाभ (Profit of Company): कंपनी के आय के बाद आपको अब यह देखना होगा कि कंपनी Year on Year में Profit कितना करती है और यह निरंतर ऊपर जा रहा है या कभी कंपनी को Loss भी हुआ है। आय कि तरह इसमें भी आपको हमेशा कंपनी का Profit from Operations पर ध्यान देना चाहिये।
Profit After Tax: जब कंपनी आपने Profit से अपने सारे Operating, Non-Operating खर्चो, Liabilities और Taxes का भुगतान कर देने के बाद जो Profit आता है, उसे Profit after Tax कहते है। आपको कंपनी का Profit after Tax का विश्लेषण करना चाहिये। यदि कंपनी का Profit after Tax (PAT) निरंतर बड़ रहा है तो इसे अच्छा माना जाता है।
प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin): कंपनी के Profit और Revenue के बाद आपको कंपनी का Profit Margin देखना चाहिये। प्रॉफिट मार्जिन आपको यह दर्शाता है कि कंपनी अपने Product या Service को बेचने के बाद कितना प्रतिशत Operating Profit Margin कमाती है। यदि किसी कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन निरंतर घटते जा रहा है तो कंपनी के लिए भविष्य में विकाश करना कठिन हो जायेगा। किसी कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन कि तुलना Same Sector के अन्य कंपनी से करनी चाहिये।
शेयर बाज़ार में की जाने वाले गलतियों से बचने के लिए पढ़े: शेयर बाज़ार कि गलतियां / Mistakes in Share Market
कंपनी के Management का विश्लेषण (Company’s Management Analysis)
आपको किसी कंपनी में निवेश के पहले उस कंपनी को चलाने वाले CEO, Director या उसके Management का विशलेषण अवश्य ही चाहिये कंपनी का विकास उसके Management पर ही निर्भर करता हैं।
कंपनी के Management के विशलेषण के अंतर्गत आपको कंपनी के Management या CEO के Experience (अनुभव) की जानकारी होनी चाहिये अपको यह पता होना चाहिये कि कंपनी के Management को कंपनी के Business का कितना लंबा या कितने वर्षो का अनुभव हैं।
आपको कंपनी के Management के अनुभव के बाद यह भी पता करना चाहिए कि Management के ऊपर किसी प्रकार की अपराधिक मामला (Criminal Case) तो नहीं है या कंपनी का Management किसी प्रकार के Froude (धोखाधड़ी) में तो शामिल नहीं है।
कंपनी के Management की जानकारी के लिए आप उसके बारे में Google में Search कर सकते हैं।
आपको यह भी जानकारी होना आवश्यक है की कंपनी का Management कंपनी के Profit या उसके भविष्य के Plans को लेकर जो भी वादे करती हैं उसे निभाने में सफल होती है या नहीं।
कंपनी के Valuation का विश्लेषण (Valuation Analysis of Company)
कंपनी का Analysis करने के बाद अब अगर आप मन बना लिए है कि किस कंपनी में आप निवेश करेंगे तो आपका Analysis अभी अधूरा हैं आपको कंपनी के Analysis के बाद अंत में आपको उसके Valuation का Analysis करना आवश्यक हैं।
निवेशकों के अनुसार अगर आप एक अच्छे कंपनी को महँगा Valuation में ख़रीद रहें हैं तो उससे अच्छा हैं यदि आप एक अच्छे कंपनी को उचित कीमत पर खरीदे।
कंपनी के Valuation को मापने के लिये कई प्रकार के Parameter हैं जिसमें से कुछ निम्नलिखित हैं:
Price to Earning Ratio: PE Ratio या कमाई का मूल्य अनुपात दर्शाता है की कोई कंपनी आपको अपने प्रति शेयर पर कितना रुपया आय (Income) कर के दे रहा है। आप कंपनी के PE Ratio को उसके Industry PE Ratio से तुलना करके कंपनी का उचित Valuation का अनुमान लगा सकते है और सही समय पर कंपनी के शेयर को उचित मूल्य पर ख़रीद सकते है।
Price to Book Ratio: PB Ratio (Price to Book Ratio) इसके द्वारा आपको यह पता लगता है की कंपनी अपने Book Value से कितने गुना या कितने मूल्य पर ट्रेड कर रहा है। PB Ratio को ज्ञात करने के लिए कंपनी के शेयर के वर्तमान मूल्य को उसके Book Value से भाग दिया जाता है। PB Ratio से कंपनी का Valuation करने के लिए उस कंपनी के Sector के अन्य कंपनियों के साथ तुलना करना चाहिये।
Price/Earning to Growth Ratio: PEG Ratio में हम PE Ratio को Divide करते है कंपनी के Growth Rate के साथ PEG Ratio जितना कम होता है उसे उतना अच्छा माना जाता है। आप कंपनी के PEG Ratio की तुलना उसी सेक्टर के अन्य कंपनियों के साथ कर सकते है जिससे आपको सटीक Valuation का ज्ञात होने में सुविधा होगा।
Mutual Fund के सभी प्रकार को सरल भाषा में समझने के लिए पढ़े: म्यूचुअल फंड के प्रकार सरल भाषा में / Types Of Mutual Funds In Easy Language