Mutual Fund का सम्पूर्ण ज्ञान हिन्दी में समझे

आज कल की भागती दौरती दुनिया में इनवेस्टमेंट(Investment) एक अच्छा विकल्प हो सकता है अपने पैसे को दिन प्रतिदिन बड़ा ने के लिए। पर बहुत से लोगों का यह प्रश्न होता है की इन्वेस्ट कहाँ और कैसे करे। तो इस पोस्ट को पड़ने के बाद आपको कोई प्रश्न नहीं रहेगा। म्यूचूअल फंड (Mutual Fund) में इन्वेस्ट करने से बहुत से लोग डरते है क्यों की इसमें रिस्क होता है।

तो एसी बात नहीं है आप अपने नालिज(Knowledge) को बढ़ाए और सोचे की जब कोई अमीर आदमी इसमें इन्वेस्ट करके और अमीर हो जाता है पर हम लोग इसमे इन्वेस्ट करने से डरते है।आपको इसमे सभी तरह की बारीकियों से म्यूचूअल फंड (Mutual Fund) का सम्पूर्ण ज्ञान का लिस्ट और कौनसा म्यूचूअल फंड (Mutual Fund) सही है उसके बारे मे बताया गया है।

Mutual Fund क्या है ?

आप अपने पैसे को अगर इन्वेस्ट करने के लिए कोई प्रॉफिटेबल स्कोर देख रहे है, तो म्यूचूअल फंड एक अच्छा विकल्प हो सकता है। म्यूचूअल फंड एक सिस्टमैटिक प्रकार का इनवेस्टमेंट करने का तरीका है, जो आपको कन्सिस्टन्टे(Consistent) रखता है। म्यूचूअल फंड में आप अपने पैसे को विभिन्न प्रकार के फंड में अपने रिस्क और इनवेस्टमेंट करने की क्षमता अनुसार इन्वेस्ट करना स्टार्ट कर सकते है। यह आपकी सैविंग को बढ़ाने के साथ-साथ एक लॉंग टर्म (Long-Term) टैक्स में भी बचत करने में भी प्रभावी होता है।

म्यूचूअल फंड में इन्वेस्ट करना और स्टॉक के शेयरों में इन्वेस्ट करने से बिल्कुल अलग होता है। आप म्यूचूअल फंड (Mutual Fund) के किसी एक होल्डिंग(Holding) में इन्वेस्ट करते है पर वह आपके पैसे को अलग-अलग स्टॉक मे इन्वेस्ट करता है। Mutual Fund में कई अलग -अलग प्रकार के फंड मैनेजर होते है जिन्हे अपने फाइनैन्शल(Financial) डोमेन में एक अच्छी नाँलेज होती है। म्यूचूअल फंड का सम्पूर्ण ज्ञान का लिस्ट नीचे दिया हुआ है।

अलग-अलग प्रकार के Mutual Fund ,जिसमें आप इन्वेस्ट कर सकते है

अपने ईन्वेस्ट्मेंट्स अमाउन्ट(Amounts) के आधार पर और अपने सहुलियत के आधार पर, निम्नलिखित म्यूचूअल फंड में कर के अच्छे खासे पैसा अर्न(Earn) कर सकते है। किसी भी म्यूचूअल फंड(Mutual Fund) स्कीम को आपको अच्छे से समझना होता है और अपने रिस्क लेने की क्षमता अनुसार इन्वेस्ट करनी चाहिए।

एक्विटी स्कीम (Equity Scheme)

Mutual Fund के केटेगरी में पहले आता है एक्विटी स्कीम(Equity scheme) जिसमें अधिक रिस्क लेने वाले इंवेसटेर इन्वेस्ट करते है। क्योंकि एक्विटी स्कीम आपके पैसे को डायरेक्ट स्टॉक मार्केट के शेयर में इन्वेस्ट करती है। स्टॉक मार्केट में कंपनी के शेयर को उसके कैपिटलिज़ैशन के आधार पर बाँटा जाता है, जिसको हम आपको एक कैल्क्यलैशन के आधार पर समझते है, मान लीजिए किसी कंपनी का एक शेयर का मार्केट प्राइस के साथ उस कंपनी के इशू शेयर के साथ गुणा करने से निकलता है।

SEBI (Security and Exchange Board of India) ने कंपनी को उसके मार्केट कैपिटलिज़ैशन(Market Capatilazation) के आधार पर तीन श्रेणियों में बाँटा गया है।

लार्ज कैप : इसमे टॉप 100 कंपनी होती है जिनका मार्केट कैपिटलिज़ैशन(Market Capitalization) सबसे ज्यादा होता है।

मिड कैप :इसमें लगभज 101 से 250 कंपनी होती है जिनका मार्केट कैपिटलिज़ैशन मेडीयां होता है।

स्मॉल कैप : वह कंपनी जिनका मार्केट कैपिटलिज़ैशन कम होता है जिसमें 251 कंपनी सामील है।

SEBI ने इक्विटी स्कीम में इन्वेस्ट करने के लिए 11 अलग-अलग प्रकार की केटेगरी बनाई है। जिनमे से एक म्यूचूअल फंड कंपनी के पास 10 केटेगरी ही हो सकती है क्योंकि कंपनी को वौल्यू या कॉनट्रा फंड(Contra Fund) में से किसी एक को ही लेना अनिवार्य है।

Sl NO. Equity Mutual FundDescription
1मल्टी कैप फंडइस फंड में एक्विटी से सबंधित इंटुर्मेंट्स का टोटल ऐसेट का 65% होता है। इस फंड में बड़ी बड़ी कंपनी मे आपके पैसे को इन्वेस्ट किया जाता है।
2लार्ज कैप फंडइस फंड में टोटल एक्विटी न्यूनतम ऐसेट का 80% होना चाहिए।
3लार्ज & मिड कैप फंडइस फंड में न्यूनतम इन्वेस्ट का टोटल ऐसेट का 35% होना चाहिए।
4मिड कैप फंडइस फंड में न्यूनतम इन्वेस्ट टोटल ऐसेट का 65% होना चाहिए।
5स्मॉल कैप फंडइस फंड में न्यूनतम इन्वेस्ट टोटल ऐसेट का 65% होना चाहिए।
6डिविडेंड़ यील्ड फंडइस स्कीम में इन्वेस्ट करने से आपको डिविडेंड़ प्रवाइड करता है इसमें न्यूनतम एक्विटी टोटल ऐसेट का 65% होना चाहिए।
7वैल्यू फंडयह फंड एक वैल्यू फंड ईन्वेस्ट्मेंट्स को फॉलो करता है जिसमें न्यूनतम एक्विटी टोटल ऐसेट का 65% होना चाहिए।
8कॉनट्रा फंडइस फंड में भी आपका न्यूनतम इन्वेस्ट टोटल ऐसेट का 65% होना चाहिए।
9फोकस्ड फंडइस फंड में कंपनी को किसी निश्चित स्कीम पर फोकस करना होता है, (जैसे मिल्ट कैप,लार्ज कैप,मिड कैप ,स्मॉल कैप) इसमें भी न्यूनतम इन्वेस्ट टोटल ऐसेट का 65% होना चाहिए।
10सेक्टरल / थिमाइटिक फंडयह फंड बसिकली उस क्षेत्र में काम करता है जो ईकानमी(economy) को इंपोएर करता है जैसे इंडस्ट्री,बैंकिंग,इंफ्रा,रुरल और फार्मा आदि। इसका भी न्यूनतम इन्वेस्ट टोटल ऐसेट का 80% होना चाहिए।
11इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (elss)ELSS स्कीम आपको बहुत प्रॉफ़िट दिला सकती है क्योंकि यह टैक्स सैविंग और लॉन्ग टर्म प्रॉफ़िट में भी अवसर प्रदान करता है। इसका न्यूनतम इन्वेस्ट टोटल ऐसेट का 80% होना चाहिए।
आपको इस म्यूचूअल फंड में एक बात यह भी याद रखना होगा की वैल्यू फंड और काँटा फंड में किसी एक को ही मंजूरी देनी होती है

डेव्ट स्कीम (Debt Scheme)

इस स्कीम में आपको इन्वेस्ट करने से पहले आपको अपनी फाइनैन्शल प्लैनिंग करनी आवश्यक है,क्योंकि इस म्यूचूअल फंड में इन्वेस्टर अपने पैसे को डेट इंट्रुमेंट्स में इन्वेस्ट किया जाता है। जैसा की कॉर्पोरेट बाँन्ड,गवर्नमेर्न्ट बाँन्ड(Bond),बैंक इत्यादि में किये जाने वाला डेट म्यूचूअल फंड बॉन्ड होते है।अगर आप एक कान्सिस्टन्स(Consistent) इन्वेस्टर है तो इस म्यूचूअल फंड स्कीम में इन्वेस्ट करना आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है क्योंकि इस स्कीम में एक रिस्क फैक्टर ज्यादा है।

Sl No.Debt Mutual Fund Scheme Description
1ओवर नईट फंड आप अगर इस फंड में निवेश करते है तो आपको एक दिन के बाद ही मैच्युरिटी मिल जाती है।
2लिक्विड फंड इस फंड में अगर आप इन्वेस्ट करते है तो 91 दिनों में मैच्युरिटी हो जाती है और इसमें एक फिक्स्ट डेपोसीट होता है।
3अल्टा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड इस फंड में आप निवेश कर सकते है, इसकी मैच्युरिटी की अवधि 3 से 6 महीने के बीच होती है।
4लोव ड्यूरेशन फंड यह फंड भी बहुत ही लोकप्रिय रहता है इसकी अवधि की बात करे तो आपको 6 से 12 महीने की मिलती है।
5मनी मार्केट फंड इस फंड के नाम में ही मनी छुपा हुआ है, इसमें इन्वेस्ट की ये हुए फंड की अवधि 1 वर्ष होता है
6शॉर्ट ड्यूरेशन फंड इस में निवेश किये हुए इंवेसटेर के पोर्ट्फोलीओ की अवधी 1से 3 वर्ष होती है
7मीडियम ड्यूरेशन फंड इस फंड स्कीम में आप इन्वेस्ट कर सकते है इस की अवधि 3 से 4 वर्ष के बीच होती है।
8मीडियम टू लांग ड्यूरेशन फंड यह फंड आपके पैसे को डेब्ट और मनी मार्केट में इन्वेस्ट करता है, इसकी अवधी 4 से 7 वर्ष की होती है
9लॉंग ड्यूरेशन फंड आप इस फंड स्कीम को एक लॉंग टर्म के लिए इन्वेस्ट कर सकते है। इसकी अवधि 7 वर्ष से अधिक होती है।
10डायनैमिक बॉन्ड यह फंड स्कीम एक डायनैमिक रुल फॉलो(Follow) करता है जिसमें आप अपने पूरे ड्यूरेशन के लिए इन्वेस्ट करते है।
11क्रेडिट रिस्क फंड यह फंड अपने टोटल एसेस्टAssets) का 65% कॉर्पोरेट बॉन्ड में इन्वेस्ट करते है।
12गिल्ट फंड यह फंड आपके पैसे को सरकार द्वोरा जारी किये गये फंड में करते है, टोटल एसेस्ट(Assets) का 80% इन्वेस्ट करते है
13कॉरपोरेट बॉन्ड फंड यह एक डेब्ट म्यूचूअल फंड होता है जिसमें कंपनी अपने एसेस्टAssets) का 80% कॉर्पोरेट बॉन्ड में लगती है।
14गिल्ट फंड विथ 10 एयर कॉन्स्टेन्टर ड्यूरेशन इस फंड में 10 साल सरकारी फंड में इन्वेस्ट करता है जो बिल्कुल सुरक्षित होता है टोटल एसेस्ट(Assets) का 80% 10 साल ले किये इन्वेस्ट करता है
15बैंकिंग & पएसयू (PSU) फंड यह फंड आपके पैसे को बैंकिंग और पब्लिक सेक्टर कंपनी में निवेस करती है यह टोटल एसेस्ट(Assets) का 80% इन्वेस्ट करता है।
16फ्लोटर फंड यह फंड पैसे को फिक्स्ट-कूपन बॉन्ड में निवेश करता है। टोटल एसेस्ट(Assets) का 65% इन्वेस्ट करती है

हाइब्रिड स्कीम (Hybrid Scheme)

यह फंड में ग्रोथ जल्दी होता है क्यों की हाइब्रिड स्कीम एक से ज्यादा फंड में इन्वेस्ट करता है जैसे एक्विटी, डेब्ट और गोल्ड आदि। यह फंड आपके इनवेस्टमेंट किये हुए पैसे को ग्रोथ और रिटर्न में एक अच्छा संतुलन बनाए रखता है। इसकी केटेगरी के आधार पर निम्नलिखित है।

Sl NO.Hybrid Mutual Fund Scheme Discription
1बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड इस फंड में फंड मैनेजर लगभग टोटल का 40-60% इक्विटी और डेब्ट में इन्वेस्ट करत है
2 अग्रेसिव हाइब्रिड फंड यह फंड में टोटल एसेस्ट का 65-80% एक्विटी फंडऔर 20-35% डेब्ट फंड में इन्वेस्ट किया जाता है
3मल्टी-एसेड अलोकेशन बैलेंस्ड अडवांटेज फंड यह फंड आपके पैसे को 3 प्रकार के अलग-अलग स्कीम में इन्वेस्ट करता है। जिसमें से पहला एक्विटी, दूसरा डेब्ट और तीसरा गोल्ड में इन्वेस्ट करता है।
4कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड यह फंड में टोटल फंड का लगभग 75-90% एक्विटी और 10-15% एक्विटी से जूरे वस्तुओ में इन्वेस्ट कीया जाता है, जिससे आपका पोर्ट्फोलीओ का ऐव्रिज अच्छा होता है।
5डायनामिक एसेट आलोकेशन बैलेंस्ड एडवांटेज फंड यह फंड अपने टोटल एसेस्ट(Assets) का 30-80% एक्विटी में इन्वेस्ट करता है और डेब्ट में भी इन्वेस्ट करता है।
6आर्बिटेज फंड यह फंड एक्विटी के प्रेजेंट और फ्यूचर के प्राइस में अंतर पर लाभ लेता है। जैसे फंड मैनेजर लॉट में एक्विटी बाय करता है और उसे मार्केट में सेल कर लाभ लेता है, यह फंड टोटल एसेस्ट(Assets) का 65% इन्वेस्ट करता है।
7 इक्विटी सेविंग यह फंड अपने पैसे को दावेरसिफाइड रखता है, जैसे फंड को एक्विटी,डेब्ट और आर्बिटेज फंड में इन्वेस्ट करता है। यह अपने टोटल एसेस्ट(Assets) का 65% और डेब्ट में 10% इन्वेस्ट करता है।

सोल्यूशंस ऑरिएन्टेड स्कीम (Solution Oriented Scheme)

यह फंड में आपके पैसे को कॅाफी दिनों के लिए एक लॉक इन पीरीअड में इन्वेस्ट किया जाता है जो निम्नलिखित रूप से दिया हुआ है।

Sl NO.Solution orientedDescription
1 रिटायरमेंट फंड इस फंड में आप अपने रिटायरमेंट के लिए एक लम्बी अवधी के लिए इन्वेस्ट कर सकते है।
2 चिल्ड्रेन्स फंड इस फंड में आप अपाने बच्चे के अच्छी एजुकेशन के लिए फंड इकट्ठा के सकते है, और इसके लिए आपको एक लम्बी अवधी तक इन्वेस्ट करना होगा।

अदर स्कीम (Other Scheme)

इस फंड में दो प्रकार के स्कीम होती है जो नीचे दिया हुआ है

Sl NO.Other SchemeDescription
1इंडेक्स फंड इस फंड में फंड मैनेजेर आपके पैसों को ज्यादा रिस्क लेकर इन्वेस्ट करते है। इस में आपके पोर्ट्फोलीओ में भी एक रिस्क फैक्टर लगा होता है।
2FOF’s
(ओवरसीज / डोमेस्टिक)
यह फंड ज्यादा चर्चित नहीं है, इसमें भी आप इन्वेस्ट कर सकते है। यह टोटल एसेस्ट का लगभग 90-95% इन्वेस्ट करता है।

प्लान के प्रकार के आधार पर (Based on the Plane) Mutual Fund देखें

आप म्यूचूअल फंड प्लान के बेस पर भी इन्वेस्ट करना स्टार्ट कर सकते है। जब SEBI ने पहले म्यूचूअल फंड के कई महत्वपूर्ण सुधार किया है, जिसमें से आप भारत में दो प्रकार के म्यूचूअल फंड में इन्वेस्ट कर सकते है। पहला डायरेक्ट प्लान म्यूचूअल फंड दूसरा रेगुलर प्लान म्यूचूअल फंड प्लान।

1. डायरेक्ट प्लान म्यूचूअल फंड (Direct Plan Mutual Fund)

इस स्कीम में आप अपने पैसे को डायरेक्ट प्लान म्यूचूअल फंड में ही निवेश करते है जिससे आपको कोई ब्रोककरेगे भी नहीं देना होता है क्योंकि इस फंड में आप अपने पोर्ट्फोलीओ से एक कोई भी कंपनी में म्यूचूअल फंड का डायरेक्ट प्लान में इन्वेस्ट कर सकते है। इस प्लान में आपको रिटर्न भी अच्छा मिलता है। इसका वार्षिक टैक्स भी बहुत कम होता है और इस प्लान का NAV भी हाइट(Height) होता है।

2.रेगुलर प्लान म्यूचूअल फंड (Regular Plan Mutual Fund)

म्यूचूअल फंड एक माध्यम जिसे हमारे पैसे को किसी कंपनी में इन्वेस्ट किया जाता है,और इसे अर्न की गई इंकम को फंड के एक्सपेनस रैशीओ से जोड़ा जाता है। यह दोनों प्लान एक ही फंड मैनेजर के स्टॉक और बॉन्ड में इन्वेस्ट करता है। बस फर्क यह है की डायरेक्ट प्लान में कोई ब्रोकर या डिस्टिव्यूटर का कमीशन नहीं देना होता, जिससे उसका रिटर्न हाइट है और रेगुलर प्लान में ब्रोकेरेज और डिस्टिव्यूटर का कमिशन होता है जिससे इस प्लान में इंवेसटेर को रिटर्न में ज्यादा इंकम नहीं होता है।

मैच्युरिटी पीरियड के आधार पर (Based on the Maturity Period) Mutual Fund

1. ओपन एंडेड म्यूचूअल फंड (Open ended mutual fund)

इस फंड में आप निवेश करना चाहते है, तो यह बहुत अच्छा सोच रहें है क्योंकि इस फंड में कोई लॅाक-इन अवधि या मैच्युरिटी समय सीमा नहीं है, आप अपने सूहीलियत के अनुसार रीडिम कीया जाता है। अगर कोई इन्वेस्टर अपना वार्षिक 12-15% रिटर्न लेना चाहता है तो इस फंड में इन्वेस्ट कर सकते है।

2. क्लोज़ एंडेड म्यूचूअल फंड (Closed ended mutual fund)

यह फंड स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड होते है,और इसके नाम से ही आपको पता चल रहा है की क्लोज्ड एंडेड स्कीम इसका मतलब इन्वेस्ट करने के बाद बीच में निकाल नहीं सकते है। इसकी एक निश्चित मैच्युरिटी अवधि होती है उदारण के लिए 2,3 और 6 वर्ष के लिए। इस फंड से भी आप एक अच्छा रिटर्न प्राप्त कर सकते है।

3. इनटेरवल  म्यूचूअल फंड (Interval Mutual fund)

यह फंड स्टॉक एक्सचेंजों में ट्रेड कर सकता है, इनर्वल म्यूचूअल फंड अपने मौजूदा NAV पर एक निश्चित अंतर पर सेल और रिडेमशन के लिए ओपन होता है। इस फंड की वार्षिक रिटर्न रेट दूसरे के कम्पेर में बहुत कम होता है। इसका वार्षिक रिटर्न 6-8% होता है।

Mutual Fund टैक्स रिटर्न के लिए कैसा है (Mutual Fund and Returns)

म्यूचूअल फंड से अर्न किये गये पैसों पर भी गोवर्मेंटस टैक्स लेती है, क्योंकि यह भी आपके द्रोरा इन्वेस्ट किये गये पैसों से एक इंकम ही होता है। और यह डेपेनद करता है की आपका होल्डिंग पीरियड और म्यूचूअल फंड किस टाइप का लिए हुए है।

1. Mutual Fund में होल्डिंग पीरियड (Holding period in Mutual fund)

आप अगर किसी भी Mutual Fund से एक कैपिटल गेन करते है तो उस पर आपको एक निश्चित टैक्स देना होगा। इस में आपको उसके होल्डिंग पीरियड और प्रॉफ़िट के ऊपर टैक्स लगता है।

टाईप शॉर्ट-टर्म होल्डिंग लॉन्ग-टर्म होल्डिंग
एक्विटी फंड 12 महीने से कम 12 महीने और उससे ज्यादा
बलेंसेड़ फंड 12 महीने से कम 12 महीने या उससे अधिक
डेब्ट फंड 36 महीने से काम 36 महीने या अधिक
2. Mutual Fund से कैपिटल गेन पर टैक्स (Mutual fund Tax on Capital Gain)

इस Mutual Fund में आपको मट्युरिटी के समय टैक्स का भूकतान करना होता है, यह टैक्स आपको उसके टाइप और समय के ऊपर लगता है।

टाइप शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स लॉंग टर्म कैपिटल गेन्स
इक्विटी फंड 15% कैपिटल गेन्स 10% बिना किसी इंडेक्सेशन
बलेंसेड़ फंड 15% 20% इन्डेक्सैशन बेनेफिट
डेब्ट फंड इंडिविदुअल इंवेसटेर के टैक्स स्लैब के अनुसार 20% आफ्टर इंडेक्सेशन
3. Mutual Fund में डिविडेंड़ पर टैक्स (Tax on Dividend)

किसी भी स्कीम में आप इन्वेस्ट कर रहे है तो अगर इंकम होता है, तो उस पर टैक्स देना होता है। अब यह डिविडेंड़ पर टैक्स का मतलब कोई कंपनी अपने इन्वेस्टर को डिविडेंट देती है। तो सरकार उस कंपनी पर डिविडेंट डिस्टरीबूसॉन टैक्स(Divident Distribution tax) लगाती है जिसे शॉर्ट मे DDT कहते है। यह मनी मार्केट,लिक्विड और डेब्ट फंड जैसे गैर-इक्विटी फंड पर टोटल 15% से 30% लगता है। इसके अलग-अलग सेक्शन के आधार पर बाटाँ गया है।

4. टैक्स सेविंग Mutual Fund (Tax Saving Mutual fund)

म्यूचूअल फंड में सबसे अधिक रिटर्न देता है इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम में आपको एक धारा 80C के तहत लगभग 1.5 लाख रुपये आपके इंकम पर टैक्स की छूट है। इस फंड में आपको लगभग 3 वर्ष का लॉक-इन अवधि होती है। जिससे पहले आप अपना पैसा बाहर नहीं निकाल सकते है। उसके बाद यह आपके ऊपर है की पैसा उस फंड में रखना है या निकालना है। इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) फंड में आपको 15%-18% का रिटर्न मिल जाता है पर यह एक हाइली रिस्क वाला स्कीम होता है।

म्यूचूअल फंड में क्या -क्या तरीके है इनवेस्टमेंट के लिए (Ways of invest in the Mutual Fund)

आपको म्यूचूअल फंड में दो तरीके मिलते है, इनवेस्टमेंट करने के लिए। पहला लम्प सम (Lump Sum) और दूसरा SIP सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान (Systematic Investment Plan) होता है। ये दोनों ही विकल्पों से आप इनवेस्टमेंट स्टार्ट कर सकते है।

1.लम्प सम (Lump sum)

यह तरीका बड़ा ही लोकप्रिय है। इसकी एक खशियत होती है की आपको महीने में कोई टेंशन नहीं रहता, पैसे को इन्वेस्ट करने के लिए। क्योंकि इसमें एक बार में ही आपका पैसा इन्वेस्ट होता है। अगर आप इस तरीके से इन्वेस्ट करना चाहते है, तो जब मार्केट नीचे हो, तब इन्वेस्ट करना चाहिए जिससे आपको रिटर्न ज्यादा से ज्यादा मिले।

2. एसआईपी (SIP) 

सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान को भी काफी इंवेसटेर(Investor) इश्तेमाल करते है, इसमें आपके पैसे को महीने के किसी एक तरिक को आपका पैसा डिडक्ट होता है। इस में आपको एक साथ कोई भारी रकम नहीं देना होता है। यह भी एक अच्छा विकल्प होता है इनवेस्टमेंट शुरू करने का जिससे आपका शॉर्ट समय में वेल्थ क्रीऐट हो जाता है।एसआईपी को कभी भी लॉंग-टर्म के लिए करना चाहिए जिससे आपको एक अच्छा रिटर्न मिल सके।

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